आज हमने हमारे बच्चो शिक्षा में इतना उलझा दिया हे की सुबह स्कूल जाने के लिए जल्दी , स्कूल से आने के बाद टयुशंन जाने की जल्दी , टयुशंन से आने के बाद कम्पुटर क्लास में जाने की जल्दी , वहा से आने के बाद होमवर्क करने की जल्दी , रात्रि में सीरयल देखने के बाद सोने चले जाने की जल्दी ,इस बिच में हमने अपने बच्चो की संस्कार कहा दिया क्योंकि समय ही नहीं मिला ,फिर वह बड़े हो जाते हे बेटिया ब्याह कर ससुराल चली जाती हे , बेटो के भरोसे हम रहते हे की पढाई कर हमारा नाम रोशन करेंगा क्योंकि हमने इस के पीछे रात दिन एक कर दिए इसके पीछे भाग भाग कर लायक बना दिया , अब इतने ऊँचे दर्जे पर पहुँच कर बुड़ापे में हमारा सहारा बनेगा , हमें श्रवण कुमार की तरह हमारी इछा के अनुरूप तीर्थ स्थान के दर्शन करएंगा ,श्रवणकुमार के समय तो कुछ नहीं था आज यात्रा के अनेक संसाधन मौजूद हे ,लेकिन हम भूल गए की हमने उसे कभी भी श्रवणकुमार की कथा ही नहीं सुनाई व् जिस प्रकार दादी,नानी , मासी , बुवा आदि ने गोद में हमें सुलाकर सुनियी थी,हमने उसे संस्कार दीए हे नहीं फिर हमें यह कैसी गलत फहमी हो गई की हमारा बेटा श्रवणकुमार जैसा हमारा साथ व्यवहार करेंगा, दोस्तों आज के इस मै (इगो) से भरे युग मे जहा हर व्यक्ति अपनी सोच दुसरे याने सामने वाले व्यक्ति पर थोप कर मनवाना चाहता हे , चाहे वह गलत हो किसी दुसरे का नुकसान हो लेकीन उसकी बात पर अमल होना जरुरी हे वरना क्या क्या नहीं हो जाता हे, इस लिए आप से अनुरोध हे की राम, क्रिष्णा, की महाभारत, रामायण , गीता की कथाये तो रोज होती हे लेकिन श्रवणकुमार पर भी कथाये कराये जिससे आपके बच्चो को संस्कार भी मिले और आपकी वर्द्ध अवस्था मे कद्र भी करे, जिसके आप सही मायने मे कद्रदान हे , और आपकी अपेक्ष्याये भी पूरी हो सके , धन्यवाद